दर्द के“चौधरी”

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दिल्ली एसेंबली चुनाव को लेकर एक्जिट पोल में बीजेपी की हार से जी न्यूज़ के एडिटर इन चीफ सुधीर चौधरी को इतनी तकलीफ हुई कि उन्होंने कह दिया कि दिल्ली के लोगों को राम मंदिर, आर्टिकल 370, कश्मीर, बालाकोट से कोई मतलब नहीं। न ही उन्हें देश के टूट जाने की कोई चिंता है। उनकी सोच ये है कि, देश टूटे-फूटे या कुछ भी होता रहे, मेरा जीवन आराम से चलना चाहिए।

इस वीडियो में गलत क्या है ?

  1. एक्जिट पोल हमारे यहां उतने ही भरोसेमंद हैं, जितने जी न्यूज़ की ख़बर। अगर एगजैक्ट पोल( सौ.-जावड़ेकर जी ) में बीजेपी जीत जाती है तब दिल्ली की जनता क्या फिर से देशभक्त मान ली जाएगी ?
  2. हमारे यहां देशभक्त कौन है, इसका सर्टिफिकेट अब तक संबित पात्रा जी देते आए हैं। अब तक पर्सनल, लोकल, रिलीजियस बेस पर सर्टिफिकेट देने वाले पात्रा जी टेंशन में हैं कि समूचे स्टेट को गद्दार करार देने का यूरेका मोमेंट चौधरी जी उनसे छीन ले गए।
  3. दुनिया में सबसे ज्यादा पत्रकार  और सबसे कम खबर हमारे देश में है। ऐसा नहीं कि बोफोर्स और 2जी का सिलसिला बंद हो गया, बस वो लोग नहीं रहे, जो रिपोर्टिंग को धंधा नहीं धर्म समझते थे।

क्या है सुधीर चौधरी की इनसाइड स्टोरी ?

जी ग्रुप पर कारपोरेट मिनिस्ट्री की इन्क्वायरी चल रही है। नवंबर में दो डायरेक्टर्स ने इल्जाम लगाया था कि कंपनी ने फिल्म खरीदने में जिस तरह रुपये खर्च किए उससे संदेह होता है कि कंपनी कारपोरेट गवर्ननेंस की कसौटी पर खरी नहीं उतर रही। डिश टीवी और सिटी केबल नेटवर्क की उधारी नहीं चुकाने को लेकर भी सवाल उठे हैं। कंपनी के मेजोरिटी शेयर बेचने के बाद सुभाष चंद्रा चेयरमैन पद छोड़ चुके हैं। इस नाजुक वक्त में कंपनी सरकार की नजर में वफादार दिखने को बेताब है।

सुधीर चौधरी  को लगता है कि सरकार हर चीज को एक खांचे में रख कर देख रही है। अपना वाला जज, अपना वाला जनरल, अपना वाला साइंटिस्ट। इसी तरह ‘अपना वाला चैनल’ के खांचे में दिखने के लिए टीवी चैनलों में होड़ सी मची है। यहां सुधीर चौधरी का मुकाबला अरनब और दीपक चौरसिया जैसे लोगों से है । आप समझ सकते हैं कि अपना वाला चैनल का सीधा मतलब है – सबसे ज्यादा सरकारी एड ।

विरोधियों से आग्रह है, सुधीर पर रहम कीजिए…बंदा पहले भी मालिक के लिए जेल गया था, अब भी मालिक के लिए ही लड़ रहा है!!!!  

 

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