जज उत्तम आनंद मौत मामला, सीबीआई जांच की प्रगति से कोर्ट नाराज

धनबाद के जज उत्तम आनंद की मौत की सीबीआई जांच की प्रगति से कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की है। हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में तीन संदिग्धों से अभी तक पूछताछ नहीं की गई है, जबकि सीसीटीवी फुटेज में वे स्पष्ट दिख रहे हैं। चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद ने सीबीआई को अगले सप्ताह विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि सीबीआई घटना की सभी कड़ी को जोड़ते हुए जांच करे। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि रिपोर्ट से पता चलता है कि ऑटो चालक ने जज को जानबूझकर टक्कर मारी है। ऐसा नशा करने की वजह से अचानक नहीं हुआ। अदालत ने कहा कि क्या सीबीआई ने उस बाइक सवार से पूछताछ की है, जो घटना के समय जज को देखता है और वहां से निकल जाता है। 

सीबीआई के जांच पदाधिकारी ने कहा कि उन्होंने उस व्यक्ति से पूछताछ की है। उसने बताया कि उसे हाई बीपी है और खून देखने से उन्हें घबराहट होती है। इसके बाद उसे छोड़ दिया गया। इस पर अदालत ने कहा कि क्या सीबीआई ने उसके मेडिकल इतिहास के बारे में दस्तावेज की जांच की है। इस दौरान जांच अधिकारी ने कहा कि तीन अन्य संदिग्ध के बारे में जानकारी ली जा रही है। सीबीआई प्रोफेशनल तरीके से जांच की हर कड़ी को जोड़ रही है, ताकि इस मामले में हुए षड्यंत्र का पर्दाफाश किया जा सके। अदालत ने कहा कि घटना के इतने दिनों बाद तीन संदिग्धों की अभी तक पहचान नहीं होना, थोड़ा निराश करने वाला है, जबकि आपके पास सीसीटीवी फुटेज भी है।

अदालत ने कहा कि कोर्ट को ऐसा प्रतीत होता है कि जब जज को ऑटो ने टक्कर मारी थी, तो उस समय बाइक सवार रुकते हुए जज को देखता है और वहां से निकल जाता है, जैसे वह इस घटना में जज की मौत होना सुनिश्चित करना चाहता है। अदालत ने उसकी पूरी जांच करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा यह जरूरी है, क्योंकि वह कोलियरी में काम करता है। 

अदालत ने रिपोर्ट में काफी कम जानकारी देने पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि सीबीआई की जांच रिपोर्ट सील बंद लिफाफे में उनके सामने प्रस्तुत की जाती है। सिर्फ कोर्ट ही इसका अवलोकन करती है और मामले के बाद उसे फिर से सीलबंद करते हुए रजिस्ट्रार जनरल के यहां रखा जाता है। इसे कोई नहीं पढ़ सकता है, क्योंकि यह पब्लिक डोमेन नहीं है और न ही कोर्ट के रिकॉर्ड में रहता है।